
Aatmajeta (Chintan Se Chaitany Kee Yaatra) आत्मजेता (चिंतन से चैतन्य की यात्रा)
by Prachi Tiwari 'Chhabi' (प्राची तिवारी 'छबि')
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Description
"मनुष्य की सर्वोच्च शक्ति उसके विचारों को चुनने की स्वतंलता है। यह सामर्थ्य जब तक उसके पास विद्यमान है, वह विपरीत से विपरीत परिस्थिति को भी अपने अनुकूल डाल सकता है।" इस सिद्धांत को आचरण में उतारने वाले डॉ. छविनाथ तिवारी हिन्दी भाषा-विज्ञान के प्रख्यात आचार्य, उच्चकोटि के साहित्यकार और मानवीय संवेदनाओं के सूक्ष्मतम आयामों के ज्ञाता थे। उनकी लेखनी में जहाँ गहन चिंतन की गंगा अविरल बहती है, वहीं जीवन-दर्शन की यमुना उसमें सहज भाव से आ मिलती है। यही कारण है कि उनकी रचनाएँ न केवल बौद्धिक रस देती हैं, बल्कि हृदय की गहराइयों को भी स्पर्श करती हैं। 'आत्मजेता' उनके चुनिंदा चिंतन और आलेखों का एक अनुपम संग्रह है, जिसमें जीवन के तीन महत्त्वपूर्ण पक्ष - व्यक्तिगत विकास, सामाजिक संतुलन और मानवीय संबंध गहनता से उद्घाटित हुए हैं एवं जटिल दार्शनिक अवधारणाओं को भी सरल जीवन-घटनाओं और सहज भाषा के माध्यम से स्पष्ट किया गया है। वस्तुतः मनुष्य का संघर्ष बाह्य संसार से नहीं, बल्कि स्वयं में छिपे हुए आंतरिक विकारों से होता है और इन पर विजय प्राप्त करना ही 'आत्मजेता' होना है। इस पुस्तक से हर उम्र के पाठक वर्ग आत्मविकास की प्रेरणा और जीवन को नई दिशा देने वाले सूल प्राप्त करते हुए चिंतन से चैतन्य की यात्रा करेंगे।
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