भँवर – खंड 1 (भाग 1) | जीवन चक्र की कहानियाँ | AGPH Books
| Dimensions | 22.86 × 15.24 × 1.6 cm |
|---|---|
| ISBN Number | 978-93-89319-90-3 |
| Authors: | मिणमाला खरे |
| No. Of Pages | 520 |
| Publication Date | 28/11/2025 |
₹1,699.00
जीवन का भँवर कथा एक ऐसी गहन साहित्यिक कृति है, जो मानव जीवन के अनवरत चक्र और उसके रहस्यों को उजागर करती है। “भँवर – खंड 1 (भाग 3)” में जीवन के उतार-चढ़ाव, संघर्ष, सुख-दुख और आत्मचिंतन को रूपक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। यह जीवन का भँवर कथा पाठक को यह समझने का अवसर देती है कि कैसे हर अनुभव जीवन की लहर बनकर हमें दिशा देता है।
इस कृति में जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म के विचारों को संवेदनशील कहानियों के माध्यम से पिरोया गया है। हर अध्याय जीवन के किसी न किसी पहलू को छूता है और पाठक को अपने भीतर झांकने के लिए प्रेरित करता है।

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भँवर – खंड 1 (भाग 1) | जीवन चक्र की कहानियाँ | AGPH Books
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जीवन का भँवर कथा एक ऐसी गहन साहित्यिक कृति है, जो मानव जीवन के अनवरत चक्र और उसके रहस्यों को उजागर करती है। “भँवर – खंड 1 (भाग 3)” में जीवन के उतार-चढ़ाव, संघर्ष, सुख-दुख और आत्मचिंतन को रूपक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। यह जीवन का भँवर कथा पाठक को यह समझने का अवसर देती है कि कैसे हर अनुभव जीवन की लहर बनकर हमें दिशा देता है।
इस कृति में जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म के विचारों को संवेदनशील कहानियों के माध्यम से पिरोया गया है। हर अध्याय जीवन के किसी न किसी पहलू को छूता है और पाठक को अपने भीतर झांकने के लिए प्रेरित करता है।

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Book Title: जीवन का भँवर कथा | भँवर – खंड 1 (भाग 1) | AGPH Books
भँवर एक धारावाहिक कृति है, जो कल्पना के माध्यम से जीवन के गहरे सत्य को छूती है। यह केवल कथाओं का संग्रह नहीं, बल्कि उस भँवर का रूपक है, जिसमें हमारा संपूर्ण जीवन निरंतर घूमता रहता है।
जिस प्रकार समुद्र में उठती लहरें भँवर का निर्माण करती हैं, उसी प्रकार हमारे जीवन की सांसें, कर्म, सुख-दुख, पीड़ा, जिम्मेदारियाँ और संघर्ष मिलकर जीवन के भँवर को आकार देते हैं।
जन्म से लेकर मृत्यु तक, हम इस भँवर की विभिन्न लहरों पर कभी ऊपर उठते हैं। कभी गहराइयों में उतरते हैं। और कभी मध्य में ठहरकर स्वयं को पहचानने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार, प्रत्येक अनुभव हमें कुछ सिखाता है।
यह सत्य है कि प्रत्येक जीवन अंततः इस भँवर की अंतिम लहर बनकर उसमें विलीन हो जाता है। लेकिन उसी अंत से किसी नए जीवन की प्रथम लहर जन्म लेती है।
भँवर इसी निरंतर चक्र, उतार-चढ़ाव और पुनर्जन्म के भाव को पालों और कथाओं के माध्यम से प्रस्तुत करती है। साथ ही, इस धारावाहिक में अनेक जीवन, अनेक पान और अनेक लहरें हैं, जिनके माध्यम से लेखक ने भँवर रूपी संसार की कल्पना की है।
यह पुस्तक केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि पाठक को उसके अपने जीवन के भँवर से परिचित कराने का एक मौन आमलण है। अंततः, शायद इस भँवर में कहीं, आपको अपना ही प्रतिबिंब दिखाई दे जाए।
जीवन का भँवर कथा
About the Author
मिणमाला खरे, मैं एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ, जहाँ मूल्यों, शिक्षा और मेहनत को सबसे ऊपर रखा जाता है। मेरी शैक्षिक यात्रा विज्ञान और सामाजिक विज्ञान दोनों से होकर गुज़री है। मैंने स्नातक में गणित (B.Sc. Maths) तथा स्नातकोत्तर में अर्थशास्त्र (M.A.), और तत्पश्चात एल.एल.बी. की डिग्री जबलपुर विश्वविद्यालय से प्राप्त की।
अध्ययन के साथ-साथ लेखन का शौक मेरे व्यक्तित्व का हमेशा एक अभिन्न हिस्सा रहा है। लेखन की शुरुआत स्कूल के दिनों से ही हो गई थी, जब स्कूल पत्रिकाओं में मेरी छोटी-छोटी कविताएँ और कहानियाँ प्रकाशित होती थीं। मेरी रचनाओं की पहली पाठक, पहली संशोधक और मेरी सबसे बड़ी आलोचक मेरी माँ थी।
जो कुछ भी मैं लिखती, उसे सबसे पहले उन्हें ही सुनाती। माँ की नसीहतें, उनके सुझाव और उनकी ईमानदार आलोचनाएँ ही मेरी लेखनी की असली गुरु थीं। मैं आज भी मानती हूँ कि मेरे लेखन को जो दिशा और धार मिली, वह उन्हीं के कारण संभव हुआ। इस सहयोग और स्नेह के लिए मैं जीवनभर उनकी आभारी रहूँगी।
समय के साथ मेरी रचनाएँ विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं जैसे धर्मयुग, सरिता, गृहशोभा, गृहलक्ष्मी, कादंबिनी में प्रकाशित होती रहीं। मेरी कविता दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख समाचार पत्र में भी छपी, जिसने मेरे भीतर बैठी लेखिका को और अधिक आत्मविश्वास दिया।
कम उम्र में ही एल.आई.सी. की प्रतियोगी परीक्षा में चयन हो जाना मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। सरकारी सेवा में प्रवेश के बाद जिम्मेदारियाँ बढ़ती गईं और मैं अपनी नौकरी में डिविजनल मैनेजर (DM) के पद तक पहुँची।
व्यस्तता बढ़ने के बावजूद लेखन का रिश्ता कभी टूटा नहीं। मेरे कार्यालय से प्रकाशित होने वाली ऑल इंडिया मैगज़ीन में भी मैं नियमित रूप से लिखती रही और वहाँ भी मेरी रचनाओं को सराहना तथा अनेक पुरस्कार मिलते रहे।
लेखन मेरे लिए केवल शौक नहीं, यह आत्म-अभिव्यक्ति, संवेदना और अनुभवों को शब्दों में ढालने का माध्यम है। जीवन के उतार-चढ़ाव, मन की कोमल भावनाएँ, समाज की बदलती तस्वीर और मानवीय रिश्तों की बारीकियाँ—यह सब मेरी लेखनी को दिशा देते हैं।
आज जब मेरी रचनाएँ पुस्तक के रूप में पाठकों के सामने उपस्थित हैं, तो यह मेरे लिए गर्व और आत्मीय संतोष का क्षण है। आशा है कि मेरे शब्द पाठकों के हृदय तक पहुँचें, उन्हें छूएँ, और शायद कहीं न कहीं उनके अनुभवों से भी जुड़ सकें।
About The Publisher
AGPH Books is a Professional Self Book Publishing House based in Central India, specializing in academic, professional, fiction, and non-fiction books in both print, digital and audio formats. The publishing house produces textbooks, research and reference works, biographies, self-help titles, children’s books, literary fiction, poetry, and general interest publications. With a transparent publishing process and strong digital distribution, AGPH Books ensures global availability through Google Books, Amazon, Flipkart, and its official website store, supporting authors and institutions in reaching a wide and diverse readership.
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भँवर – खंड 1 (भाग 1) | जीवन चक्र की कहानियाँ | AGPH Books
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| ISBN Number | 978-93-89319-90-3 |
| Authors: | मिणमाला खरे |
| No. Of Pages | 520 |
| Publication Date | 28/11/2025 |
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