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व्यावसायिक  समाजकार्य: भारतीय परिप्रेक्ष्य

व्यावसायिक समाजकार्य: भारतीय परिप्रेक्ष्य

by डॉ. हरीश सखारे

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Description

“व्यावसायिक समाजकार्य: भारतीय परिप्रेक्ष्य” पुस्तक समाजकार्य के पेशेवर अनुशासन को भारतीय संदर्भ में समझाने का एक व्यापक प्रयास है। यह पुस्तक भारतीय समाज की जटिलताओं और विविधताओं को ध्यान में रखते हुए समाजकार्य के सिद्धांतों, इतिहास और विकास पर विस्तृत चर्चा करती है। इसमें समाज कार्य के विभिन्न पहलुओं जैसे- महिला सशक्तिकरण, बाल कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और विकलांगता पर विशेष ध्यान दिया गया है। यह पुस्तक समाज कार्य की शिक्षा, प्रशिक्षण और इसके व्यावहारिक पहलुओं को समझने में मदद करती है, साथ ही यह पेशेवर समाज कार्यकर्ताओं के लिए एक मार्गदर्शिका का कार्य करती है, जो समाज के कमजोर और वंचित वर्गों की समस्याओं के समाधान में जुटे हुए हैं। समाजकार्य का उद्देश्य केवल दान या परोपकार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में सुधार, सामाजिक न्याय और मानवाधिकार की दिशा में कार्य करता है। यह पुस्तक समाजकार्य के छात्रों, पेशेवर समाज कार्यकर्ताओं, नीति निर्माताओं और शैक्षिक संस्थानों के लिए अत्यधिक उपयोगी है। समाजकार्य में शिक्षा प्राप्त कर रहे छात्रों को यह पुस्तक समाजकार्य के सिद्धांतों, अभ्यास और भारतीय संदर्भ में इसके महत्व को समझने में मदद करने का प्रयास करती है। इसके अलावा, यह नीति निर्माताओं और सामाजिक क्षेत्र में कार्य कर रहे व्यक्तियों को समाज के विभिन्न मुद्दों को समझने और प्रभावी समाधान प्रदान करने में मदद करती है। शैक्षिक संस्थानों और प्रशिक्षकों के लिए भी यह पुस्तक एक महत्वपूर्ण संसाधन है, जो समाजकार्य के पाठ्यक्रम को भारतीय संदर्भ में प्रासंगिक बनाने के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं।

Product Details

No. Of Pages:245
ISBN Number:978-81-983517-7-7

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Weight: 0.35 kg
Length: 23.00 cm
Width: 15.00 cm
Height: 2.50 cm

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