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व्यक्तित्व विकास एवं भारतीयता | Self Development India | AGPH Books

व्यक्तित्व विकास एवं भारतीयता | Self Development India | AGPH Books

by Dr. Preetam Singh

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Description

Book Title: व्यक्तित्व विकास एवं भारतीयता | Self Development India | AGPH Books

पुस्तक “व्यक्तित्व विकास एवं भारतीयता” आधुनिक युग में व्यक्तित्व निर्माण और सांस्कृतिक पहचान के महत्व को समर्पित एक विशिष्ट ग्रंथ है। यह केवल व्यक्ति के बाह्य रूप और व्यवहार तक सीमित नहीं है, बल्कि आंतरिक शक्तियों, नैतिक मूल्यों और मानसिक सुदृढ़ता के विकास पर भी केंद्रित है। पुस्तक में यह स्पष्ट किया गया है कि सशक्त और संतुलित व्यक्तित्व का निर्माण केवल शिक्षा या पेशेवर कौशल से नहीं होता, बल्कि इसमें आत्मचिंतन, मानसिक अनुशासन तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक संवेदनशीलता का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है।

पुस्तक का प्रमुख विषय यह है कि व्यक्तित्व विकास और भारतीयता एक-दूसरे के पूरक हैं। लेखक ने बताया है कि आधुनिक जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए आवश्यक गुण—जैसे नेतृत्व क्षमता, संचार कौशल, समय प्रबंधन, निर्णय लेने की क्षमता और संघर्षों से निपटने की योग्यता—भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और जीवन-दर्शन से गहराई से जुड़े हैं। उदाहरण के लिए, भारतीय परंपरा में आत्म-संयम, धर्मनिष्ठा और करुणा जैसे मूल्य न केवल सामाजिक समरसता को बढ़ावा देते हैं, बल्कि व्यक्ति को मानसिक रूप से भी सुदृढ़ बनाते हैं।

पुस्तक में व्यक्तित्व विकास के विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। इसमें आत्म-साक्षात्कार, मनोवैज्ञानिक संतुलन, सकारात्मक सोच और नैतिक निर्णय लेने की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया गया है। लेखक ने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों—शिक्षा, कार्यक्षेत्र, परिवार और समाज—में व्यक्तित्व विकास के व्यावहारिक पहलुओं को उदाहरणों और उपयोगी साधनों के माध्यम से समझाया है। साथ ही, पुस्तक में भारतीय दार्शनिक विचारधाराओं, जैसे गीता, उपनिषद और रामायण से प्रेरित सिद्धांतों का उपयोग करते हुए यह समझाने का प्रयास किया गया है कि व्यक्ति अपने आंतरिक गुणों और क्षमताओं को पहचानकर समाज में प्रभावशाली भूमिका कैसे निभा सकता है।

इस पुस्तक की एक विशेष विशेषता यह है कि यह केवल व्यक्तिगत विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारियों और राष्ट्रीय चेतना के महत्व को भी रेखांकित करती है। पुस्तक में बताया गया है कि जब व्यक्ति अपने सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को अपने व्यक्तित्व का हिस्सा बनाता है, तब वह न केवल अपने व्यक्तिगत जीवन को बेहतर बनाता है, बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी सार्थक योगदान दे सकता है।

समग्र रूप से, “व्यक्तित्व विकास एवं भारतीयता” युवाओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों और पेशेवरों के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शक के रूप में कार्य करती है। यह पुस्तक पाठकों को आत्मविश्वास, संतुलन, नैतिकता और सामाजिक संवेदनशीलता के साथ जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। आधुनिक जीवन की आवश्यकताओं और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के बीच संतुलन स्थापित करने का इसका प्रयास इसे व्यक्तित्व विकास तथा मूल्य-आधारित जीवन-दृष्टि के संदर्भ में एक उपयोगी पुस्तक बनाता है।

About The Publisher:

AGPH Books is a professional self-book publishing house based in Central India, specializing in academic, professional, fiction, and non-fiction books in print, digital, and audio formats. The publishing house produces textbooks, research and reference works, biographies, self-help titles, children's books, literary fiction, poetry, and general interest publications. With a transparent publishing process and strong digital distribution, AGPH Books ensures global availability through Google Books, Amazon, Flipkart, and its official website store, supporting authors and institutions in reaching a wide and diverse readership.

Product Details

No. Of Pages:338
Publication Date:2026-01-29
ISBN:978-93-7640-982-2

Shipping Details

Weight: 0.40 kg
Length: 22.86 cm
Width: 15.24 cm
Height: 1.60 cm

About the Author

Dr. Preetam Singh
Dr. Preetam Singh

डॉ. प्रीतम सिंह मनोविज्ञान और समाज कार्य (Social Work) के क्षेत्र में एक अकादमिक और शोधकर्ता हैं, जिनके पास एक दशक से अधिक का शिक्षण अनुभव है। वे 2013 से अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा मध्यप्रदेश के समाज कार्य विभाग में अतिथि विद्वान (Guest Faculty) के रूप में कार्यरत हैं। डॉ. सिंह मनोविज्ञान में पीएच.डी. हैं, जिनका शोध कार्य कार्यरत और गैर-कार्यरत महिलाओं में जीवन तनाव, अवसाद और स्वास्थ्य स्थिति पर केंद्रित था। उन्होंने मनोविज्ञान, समाज कार्य और पर्यटन प्रशासन में स्नातकोत्तर योग्यताएँ भी प्राप्त की हैं, जो उनके अंतर्विषयक (interdisciplinary) अकादमिक पृष्ठभूमि को दर्शाती हैं। उनके शोध रुचियों में मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, परामर्श (Counselling), महिलाओं का मनोवैज्ञानिक कल्याण और सामाजिक मुद्दे शामिल हैं। डॉ. सिंह ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित जर्नल्स में शोध पत्र प्रकाशित किए हैं और अकादमिक सम्मेलनों, सेमिनारों और कार्यशालाओं में सक्रिय भागीदारी निभाई है। उनका शैक्षणिक कार्य नैतिक अभ्यास (ethical practice), सामाजिक जिम्मेदारी और व्यक्तिगत तथा समाज कल्याण के लिए मनोवैज्ञानिक ज्ञान के अनुप्रयोग पर जोर देता है।

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