
भारतीय न्याय व्यवस्था और विधिक जागरूकता | विधिक जागरूकता और अधिकार | AGPH Books
by डॉ. राम शंकर (Dr. Ram Shankar)
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Description
Book Title: भारतीय न्याय व्यवस्था और विधिक जागरूकता | विधिक जागरूकता और अधिकार | AGPH Books
यह पुस्तक “भारतीय न्याय व्यवस्था और विधिक जागरूकता” भारतीय न्याय प्रणाली की संरचना, कार्यप्रणाली तथा विधिक जागरूकता के महत्व को सरल, स्पष्ट और व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करने का एक प्रयास है। किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र की आधारशिला उसकी न्याय व्यवस्था होती है जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा, कर्तव्यों के निर्वहन और समाज में संतुलन बनाए रखने का कार्य करती है। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में न्यायिक प्रणाली का स्वरूप अत्यंत व्यापक और बहुआयामी है, जिसे समझना प्रत्येक नागरिक के लिए आवश्यक हो जाता है। भारतीय न्याय व्यवस्था संविधान द्वारा संचालित एक सुदृढ़ तंत्र है जिसमें सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय तथा अधीनस्थ न्यायालयों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह व्यवस्था न केवल विधिक विवादों का समाधान करती है, बल्कि समाज में न्याय, समानता और स्वतंत्रता के मूल्यों को भी सुदृढ़ बनाती है। इसके साथ ही, विधिक जागरूकता का प्रसार नागरिकों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग बनाता है, जिससे वे अन्याय के विरुद्ध सशक्त रूप से खड़े हो सकें। समाज में अनेक बार यह देखा जाता है कि विधिक जानकारी के अभाव में लोग अपने अधिकारों का सही उपयोग नहीं कर पाते और कई बार शोषण का शिकार हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में विधिक जागरूकता एक सशक्त उपकरण के रूप में कार्य करती है जो व्यक्ति को न केवल कानून की जानकारी देती है, बल्कि उसे आत्मविश्वास और सुरक्षा का अनुभव भी कराती है। इस संदर्भ में यह पुस्तक न्याय व्यवस्था की मूलभूत अवधारणाओं को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हुए विधिक साक्षरता को बढ़ावा देने का कार्य करता है। इस पुस्तक में न्याय प्रणाली की संरचना, विभिन्न न्यायालयों की भूमिका, न्यायिक प्रक्रियाओं की विशेषताएँ, नागरिकों के मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य, तथा विधिक सहायता से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं को विस्तारपूर्वक समझाया गया है। साथ ही, समकालीन संदर्भों में न्याय व्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके संभावित समाधान पर भी विचार किया गया है। यह प्रयास किया गया है कि विषयवस्तु को इस प्रकार प्रस्तुत किया जाए जिससे पाठक को जटिल कानूनी अवधारणाएँ भी सहजता से समझ में आ सकें। वर्तमान समय में जब सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी परिवर्तन तीव्र गति से हो रहे हैं, तब न्याय व्यवस्था की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे परिवर्तनों के बीच विधिक जागरूकता समाज में न्याय और समानता को बनाए रखने का एक सशक्त माध्यम बनती है। इस दृष्टि से यह पुस्तक न केवल विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए उपयोगी है, बल्कि सामान्य नागरिकों के लिए भी अत्यंत प्रासंगिक सिद्ध हो सकता है।
About The Publisher:
AGPH Books is a professional self-book publishing house based in Central India, specializing in academic, professional, fiction, and non-fiction books in print, digital, and audio formats. The publishing house produces textbooks, research and reference works, biographies, self-help titles, children's books, literary fiction, poetry, and general interest publications. With a transparent publishing process and strong digital distribution, AGPH Books ensures global availability through Google Books, Amazon, Flipkart, and its official website store, supporting authors and institutions in reaching a wide and diverse readership.
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About the Author
डॉ. राम शंकर, सह प्राध्यापक (विधि संकाय) का जन्म मध्य प्रदेश के चम्बल अंचल के मुरैना जिले के थाना सिंहोनिया के ग्राम कोल्हुआ में हुआ। आपने पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल मुरार, ग्वालियर से हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। शासकीय विज्ञान महविद्यालय, ग्वालियर से जैव विज्ञान विषय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की। महात्मा गांधी विधि महाविद्यालय, ग्वालियर से विधि स्नातक की उपाधि प्रथम श्रेणी में प्राप्त की। महारानी लक्ष्मीबाई उत्कृष्ठ महाविद्यालय, ग्वालियर से विधि स्नातकोत्तर की उपाधि प्रथम श्रेणी में प्राप्त की। जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर से विधि विषय में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। 26 नवम्बर 2010 से जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर के विधि अध्ययनशाला में अध्यापन एवं शोध कार्य में व्यस्त।
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