
भारतीय ज्ञान पद्धति और समकालीन सुशासन | नैतिक शासन और नीति | AGPH Books
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Description
यह पुस्तक भारतीय ज्ञान परंपरा और समकालीन सुशासन के मध्य गहरे संबंधों का व्यापक अध्ययन प्रस्तुत करती है। इसमें वेद, उपनिषद, अर्थशास्त्र, धर्मशास्त्र तथा लोक परंपराओं में निहित प्रशासनिक और नैतिक सिद्धांतों को आधुनिक शासन व्यवस्था के संदर्भ में समझाया गया है। पुस्तक सत्य, न्याय, उत्तरदायित्व, पारदर्शिता और लोककल्याण जैसे मूल्यों को सुशासन की आधारशिला के रूप में स्थापित करती है। नीति निर्माण, नेतृत्व, प्रशासनिक सुधार और सतत विकास जैसे विषयों पर भारतीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए यह पुस्तक छात्रों, शोधार्थियों, प्रशासकों और नीति-निर्माताओं के लिए एक उपयोगी एवं विचारोत्तेजक संदर्भ ग्रंथ सिद्ध होती है।
About The Publisher:
AGPH Books is a Professional Self Book Publishing House based in Central India, specializing in academic, professional, fiction, and non-fiction books in both print, digital and audio formats. The publishing house produces textbooks, research and reference works, biographies, self-help titles, children’s books, literary fiction, poetry, and general interest publications. With a transparent publishing process and strong digital distribution, AGPH Books ensures global availability through Google Books, Amazon, Flipkart, and its official website store, supporting authors and institutions in reaching a wide and diverse readership.
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About the Author
डॉ. शालिनी चतुर्वेदी जयपुर स्थित राजस्थान विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग की विभागाध्यक्ष और एसोसिएट प्रोफेसर हैं। उन्हें 26 वर्षों का शिक्षण अनुभव और 15 वर्षों का शोध अनुभव है। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों और सेमिनारों में 155 शोध पत्न प्रस्तुत किए हैं। उनके 70 शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्निकाओं, यूजीसी केयर लिस्टेड पत्निकाओं, स्कोपस पत्निकाओं और पीयर रिव्यू पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने 90 से अधिक कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लिया है। उन्होंने 16 पुस्तकों में अध्याय लिखे हैं, जिनमें 6 पुस्तकें एकल लेखिका के रूप में, 5 पुस्तकें सह-लेखिका के रूप में और 3 पुस्तकें सह-संपादक के रूप में शामिल हैं। वे आईआईपीए, आईपीएसए और एनईपीएएसआई की आजीवन सदस्य हैं और कई संस्थानों और संगठनों से जुड़ी हुई हैं। उनकी विशेषज्ञता के क्षेत्र प्रशासनिक सिद्धांत और प्रबंधन, मानव संसाधन प्रबंधन, तुलनात्मक लोक प्रशासन, अनुसंधान पद्धति, स्थानीय शासन और भारतीय संविधान, पर्यावरण और सतत विकास, लोक प्रशासन में नैतिकता हैं। उनके मार्गदर्शन में कई पीएचडी शोध प्रबंधों को उपाधि प्रदान की गई है। वे कई प्रशासनिक, शैक्षणिक और अनुसंधान समितियों की संयोजक हैं।
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