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भँवर – खंड 1 (भाग 3) | जीवन चक्र की कहानियाँ | AGPH Books

भँवर – खंड 1 (भाग 3) | जीवन चक्र की कहानियाँ | AGPH Books

by मिणमाला खरे

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Description

भँवर एक धारावाहिक कृति है, जो कल्पना के माध्यम से जीवन के गहरे सत्य को छूती है। यह केवल कथाओं का संग्रह नहीं, बल्कि उस भँवर का रूपक है, जिसमें हमारा संपूर्ण जीवन निरंतर घूमता रहता है।

जिस प्रकार समुद्र में उठती लहरें भँवर का निर्माण करती हैं, उसी प्रकार हमारे जीवन की सांसें, कर्म, सुख-दुख, पीड़ा, जिम्मेदारियाँ और संघर्ष मिलकर जीवन के भँवर को आकार देते हैं।

जन्म से लेकर मृत्यु तक, हम इस भँवर की विभिन्न लहरों पर कभी ऊपर उठते हैं। कभी गहराइयों में उतरते हैं। और कभी मध्य में ठहरकर स्वयं को पहचानने का प्रयास करते हैं। इस प्रकार, प्रत्येक अनुभव हमें कुछ सिखाता है।

यह सत्य है कि प्रत्येक जीवन अंततः इस भँवर की अंतिम लहर बनकर उसमें विलीन हो जाता है। लेकिन उसी अंत से किसी नए जीवन की प्रथम लहर जन्म लेती है।

भँवर इसी निरंतर चक्र, उतार-चढ़ाव और पुनर्जन्म के भाव को पालों और कथाओं के माध्यम से प्रस्तुत करती है। साथ ही, इस धारावाहिक में अनेक जीवन, अनेक पान और अनेक लहरें हैं, जिनके माध्यम से लेखक ने भँवर रूपी संसार की कल्पना की है।

यह पुस्तक केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि पाठक को उसके अपने जीवन के भँवर से परिचित कराने का एक मौन आमलण है।...

Product Details

No. Of Pages:668
ISBN:9789389319309

Shipping Details

Weight: 0.40 kg
Length: 22.86 cm
Width: 15.24 cm
Height: 1.60 cm

About the author

मिणमाला खरे
मिणमाला खरे

मिणमाला खरे, मैं एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ, जहाँ मूल्यों, शिक्षा और मेहनत को सबसे ऊपर रखा जाता है। मेरी शैक्षिक यात्रा विज्ञान और सामाजिक विज्ञान दोनों से होकर गुज़री है। मैंने स्नातक में गणित (B.Sc. Maths) तथा स्नातकोत्तर में अर्थशास्त्र (M.A.), और तत्पश्चात एल.एल.बी. की डिग्री जबलपुर विश्वविद्यालय से प्राप्त की। अध्ययन के साथ-साथ लेखन का शौक मेरे व्यक्तित्व...

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भँवर – खंड 1 (भाग 3)