
इतिहास की धारा: सभ्यता से आधुनिक भारत तक | भारतीय इतिहास अध्ययन | AGPH Books
by Prof. Ajeet Singh, Dr. Umesh Chandra Yadava
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Description
Book Title: इतिहास की धारा: सभ्यता से आधुनिक भारत तक | भारतीय इतिहास अध्ययन | AGPH Books
‘इतिहास की धारा: सभ्यिा से आधुतिक भारि िक’ एक ऐसी पुस्तक है जो मािव सभ्यिा के तवकास, उसके संघर्षों, उपलब्धियों और सामातजक पररविति की यात्रा को तवस्तार से प्रस्तुि करिी है। यह पुस्तक ि के वल ऐतिहातसक िथ्ों का संग्रह है, बब्धि यह उस तिरंिर धारा का तित्रण भी करिा है तजसिे भारि को प्रािीि गौरव से आधुतिक युग िक पहुँिाया है। पुस्तक की शुरुआि तवश्व की प्रािीि सभ्यिाओं की झलक से होिी है, जहाुँ पाठक को यह समझिे का अवसर तमलिा है तक मािव समाज कैसे प्रारंतभक जीवि से संगतठि समुदायों िक तवकतसि हआ। इसके बाद लेखक भारि की सांस्कृ तिक, धातमतक और राजिीतिक परंपराओं की गहराई में उिरिा है, जहाुँ वैतदक काल, मौयत और गुप्त साम्राज्य जैसे स्वतणतम युगों का तवस्तारपूवतक वणति तमलिा है। मध्यकालीि भारि में इस्लामी प्रभाव, भब्धि आंदोलि और समाज में आई िई तविारधाराओं का उल्लेख करिे हए पुस्तक यह तदखािी है तक भारि की तवतवधिा कैसे उसकी शब्धि बिी। आधुतिक युग के अध्यायों में औपतिवेतशक शासि, स्विंत्रिा संग्राम और आजादी के बाद के सामातजक-राजिीतिक पररविति को तवस्तार से बिाया गया है। यह पुस्तक के वल घटिाओं का क्रम िहीं, बब्धि इतिहास को समझिे की एक दृति प्रदाि करिी है। इसमें यह स्पि तकया गया है तक अिीि की घटिाएुँ वितमाि समाज की संरििा और सोि को कैसे प्रभातवि करिी हैं। सहज भार्षा, प्रामातणक स्रोिों और संिुतलि तवश्लेर्षण के कारण यह पुस्तक तवद्यातथतयों, शोधातथतयों और इतिहास प्रेतमयों के तलए समाि रूप से उपयोगी है।
About The Publisher:
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About the Author
डॉ. अजीत सिंह, एक अनुभवी इतिहासकार एवं प्राध्यापक हैं, जिन्होंने एम.ए. एवं पी-एच.डी. की उपाधि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी से प्राप्त की है। वर्तमान में बुंदेलखंड कॉलेज झाँसी में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष इतिहास पद पर कार्यरत हैं। उन्हें स्नातक तथा स्नातकोत्तर दोनों स्तरों पर 31 वर्षों का शिक्षण अनुभव प्राप्त है। इसके साथ ही बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झाँसी के इतिहास विषय के समन्वयक की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। उनका प्रमुख अध्ययन एवं शोध क्षेत्र बुंदेलखंड का इतिहास रहा है। अपने शैक्षणिक जीवन में उन्होंने अनेक शोधार्थियों को पी-एच.डी. उपाधि के लिए सफलतापूर्वक निर्देशन प्रदान किया है। उन्होंने अब तक अनेकों राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सेमिनारों और सम्मेलनों में भाग लिया है तथा इनके अनेकों शोध-पत्र प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। आपका शैक्षणिक और शोध कार्य अत्यंत सराहनीय रहा है।
डॉ. उमेश चन्द्र यादव ने दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर से पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश के झाँसी स्थित बुंदेलखंड डिग्री कॉलेज के इतिहास विभाग में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें आठ वर्ष से अधिक का शिक्षण एवं शोध का अनुभव प्राप्त है। उनके शोध-कार्य का प्रमुख क्षेत्र मध्यकालीन तथा आधुनिक इतिहास रहा है, जिसमें महिला अध्ययन के सूक्ष्म पहलू, सामाजिक-पर्यावरणीय आंदोलनों तथा ग्रामीण समाज की सामाजिक और आर्थिक संरचना जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने मानवाधिकार से संबंधित विषय पर एक पुस्तक का संपादन भी किया है। उन्होंने कई प्रतिष्ठित शैक्षणिक पत्रिकाओं में अपने शोध लेख प्रकाशित किए हैं और राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित संगोष्ठियों तथा कार्यशालाओं में सक्रिय सहभागिता करते हुए समसामयिक मुद्दों पर अपने विचार प्रस्तुत किए हैं।
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