
अधिगम और शिक्षण के मूल तत्त्व | अधिगम सिद्धांत एवं शिक्षण | AGPH Books
by डॉ. निधि शुक्ला, डॉ. कीर्ति शुक्ला
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Description
Book Title: अधिगम और शिक्षण के मूल तत्त्व | अधिगम सिद्धांत एवं शिक्षण | AGPH Books
“अधिगम और धिक्षण” एक ऐसी िैक्षधणक पुस्तक हैजो धिक्षण प्रक्रिया केमूल तत्वों, अधिगम केधसद्ाांतों तथा धिक्षक-छात्र सांबांिों की गहराई को सरल और व्यवधस्थत रूप मेंप्रस्तुत करती है। यह पुस्तक धिक्षािास्त्र, मनोधवज्ञान और धिक्षा केआिुधनक दृधिकोणों को एक साथ जोड़ती है, धजससेपाठक को यह समझनेमेंसहायता धमलती हैक्रक वास्तधवक सीखना क्रकस प्रकार घटित होता हैऔर प्रभावी धिक्षण केधलए क्रकन-क्रकन कारकों की आवश्यकता होती है। पुस्तक मेंअधिगम की धवधभन्न पटरभाषाएँ, उसकेप्रकार, धसद्ाांत तथा अधिगम को प्रभाधवत करनेवालेव्यधिगत और सामाधजक तत्वों का धवश्लेषण क्रकया गया है। इसमेंव्यवहारवादी, सांज्ञानात्मक और धनमााणवादी अधिगम धसद्ाांतों की तुलना के माध्यम सेयह स्पि क्रकया गया हैक्रक सीखना के वल ज्ञान अजान की प्रक्रिया नहीं, बधकक अनुभव, क्रियािीलता और च ांतन का पटरणाम है। धिक्षण भाग मेंयह पुस्तक धिक्षक की भूधमका, धिक्षण की योजनाएँ, धवधियाँ, रणनीधतयाँऔर मूकयाांकन की प्रक्रिया पर धविेष ध्यान देती है। इसमेंआिुधनक धिक्षण तकनीकों जैसे पटरयोजना आिाटरत अधिगम, सांवादात्मक धिक्षण, सहयोगात्मक अधिगम और धिधजिल माध्यमों के उपयोग को भी धवस्तार से समझाया गया है। यह पुस्तक न के वल धिक्षक प्रधिक्षण कायािमों केधलए उपयोगी है, बधकक धिक्षा केछात्रों और िोिार्थायों केधलए भी एक महत्वपूणामागादर्िाका धसद् होती है। इसकी भाषा सरल, सिीक और व्यावहाटरक उदाहरणों सेयुि है, धजससेपाठक को अविारणाएँसहज रूप मेंसमझ आती हैं।
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About the Author
डॉ. निधि शुक्ला सहायक प्राध्यापक (संविदा) हैं। उन्होंने इतिहास में M.A., मनोविज्ञान में M.A., M.Ed. तथा शिक्षा में Ph.D. की उपाधियाँ प्राप्त की हैं। वे पिछले 15 वर्षों से अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा में अध्यापन कार्य से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्हें B.Ed. तथा M.A. Education के विद्यार्थियों को पढ़ाने का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ है। डॉ. निधि शुक्ला ने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्यशालाओं, संगोष्ठियों तथा सेमिनारों में सक्रिय रूप से सहभागिता की है। उनके 7–8 शोध-पत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं और सम्मेलनों में प्रकाशित हो चुके हैं। उनका प्रारंभिक जीवन और शिक्षा रीवा से हुई है। अध्यापन, शोध और शैक्षणिक गतिविधियों के प्रति उनकी निरंतर रुचि ने उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुभव प्रदान किया है।
डॉ. कीर्ति शुक्ला सहायक प्राध्यापक (संविदा) हैं। उन्होंने इतिहास एवं हिंदी में M.A., M.Ed. तथा शिक्षा में Ph.D. की उपाधियाँ प्राप्त की हैं। वे पिछले 12 वर्षों से अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा में अध्यापन कार्य से जुड़ी हुई हैं। इस दौरान उन्हें B.Ed. तथा M.A. (Education) की कक्षाओं को पढ़ाने का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ है। डॉ. कीर्ति शुक्ला ने विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों तथा शैक्षणिक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से सहभागिता की है। उनके 4 राष्ट्रीय एवं 3 अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त, उन्हें रीवा के डी.आर.एस. बी.एड. कॉलेज में 3 वर्षों तक अध्यापन का अनुभव भी प्राप्त है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा कानपुर में हुई। अध्यापन, शोध एवं शैक्षणिक गतिविधियों के प्रति उनकी निरंतर रुचि और अनुभव ने उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में एक सक्षम एवं अनुभवी शिक्षाविद के रूप में स्थापित किया है।
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