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अकादमिक शोध भाग 1 : अवधारणाएँ , प्रक्रिया एवं प्रविधि | सरल शोध अवधारणा मार्गदर्शिका | AGPH Books

अकादमिक शोध भाग 1 : अवधारणाएँ , प्रक्रिया एवं प्रविधि | सरल शोध अवधारणा मार्गदर्शिका | AGPH Books

by डॉ. मेघा पाण्डेय

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Description

Book Title : अकादमिक शोध भाग 1 : अवधारणाएँ , प्रक्रिया एवं प्रविधि | सरल शोध अवधारणा मार्गदर्शिका | AGPH Books

शोध, शैक्षिक उपलब्धि का अगला चरण है जहाँ से अभी तक प्राप्त ज्ञान को समाज को देने की व्यवस्थित प्रक्रिया प्रारंभ होती है।

सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में शोध एक गंभीर, जटिल एवं लंबी प्रक्रिया होती है, जिसमें चुने गए शोध विषय पर निष्पक्ष एवं वैज्ञानिक रूप से कार्य करना चुनौतीपूर्ण होता है। इस चुनौती का सामना वही शोधार्थी कर सकता है जो एक ईमानदार विद्यार्थी रहा हो।

आधुनिक भारत में स्वतंत्रता के पूर्व एवं स्वतंत्रता के पश्चात कुछ दशकों तक शोध उपाधि प्राप्त करना अकादमिक एवं सामाजिक रूप से सम्मानजनक रहा। पिछले तीन–चार दशकों में शोध गुणवत्ता में भारी पतन आया है।

केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों द्वारा तथा राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय विभिन्न शोध संस्थानों द्वारा दी जाने वाली विभिन्न शोध छात्रवृत्तियों के उपरांत भी शोध गुणवत्ता में सुधार नहीं होना निराशाजनक रहा है।

अकादमिक शोध का उद्देश्य होता है—‘देश एवं समाज की जटिल सामाजिक-राजनीतिक-आर्थिक-सांस्कृतिक समस्याओं का तार्किक एवं व्यावहारिक अध्ययन कर वैकल्पिक समाधान प्रस्तुत करना’ और जब यह अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं होते हैं तब अकादमिक शोध कार्य का महत्व मात्र उपाधि प्राप्त करना रह जाता है।

वर्ष 2017 में तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री ने वर्तमान अकादमिक शोध के असंतोषजनक और परिणामहीन होने के कारण अत्यंत रोष व्यक्त किया था।

कुछ शिक्षाविद एवं बुद्धिजीवी भी देश में पीएच.डी. (पूर्व में एम.फिल. भी) उपाधि के लिए किए जाने वाले अकादमिक शोधों की गुणवत्ता और उपयोगिता (आउटपुट) निम्नस्तरीय होने, अधिकांश कॉपी कार्य होने आदि की शिकायत करते रहे हैं।

Research is a next stage after the educational achievement, from where the systematic process of returning yet received knowledge to the society, started.

The University Grants Commission (UGC) has prohibited Master of Philosophy (M.Phil.) degree under its Regulation no. 14 - Minimum Standards and Procedures for award of Ph.D. Degree, Notification 2022.

अच्छी और सकारात्मक बात यह है कि सरकार ने समय-समय पर निर्णय लेकर अकादमिक शोध में सुधार के प्रयास किए हैं। साथ ही, पीएच.डी. उपाधि की शोध-अध्ययन की गुणवत्ता को सुधारने और विद्यार्थियों में शोध प्रवृत्ति को विकसित करने के प्रावधानों पर बल दिया गया है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 विद्यालयीन (स्कूल) विद्यार्थियों में संज्ञानात्मक कौशल (Cognitive Skill) एवं शोधपरक अध्ययन (Research based Study) का बीजारोपण करती है, और उच्च शिक्षा में ‘अकादमिक शोध सीखने की क्रमिक पदस्थापनिक व्यवस्था’ (Consequential Hierarchical System of Learning Academic Research) का प्रावधान करती है।

फलस्वरूप, जहाँ पहले विद्यार्थियों को शोध-प्रविधि का अध्ययन स्नातकोत्तर के अंतिम वर्ष (तृतीय या चतुर्थ सेमेस्टर) में कराया जाता था और एम.फिल तथा पीएच.डी. की उपाधि हेतु ही शोध प्रतिवेदन (थीसिस/डिसर्टेशन/रिपोर्ट) लिखवाई जाती थी, अब नवीन नीति के अंतर्गत स्नातक स्तर पर ही तृतीय और चतुर्थ वर्ष (पंचम/षष्ठम या सप्तम सेमेस्टर) में तथा स्नातकोत्तर स्तर पर प्रथम वर्ष (द्वितीय सेमेस्टर) में शोध-प्रविधि का अध्ययन प्रारंभ किया जा चुका है तथा स्नातक के अंतिम चतुर्थ वर्ष (ऑनर्स/ऑनर्स विद रिसर्च) (अष्टम सेमेस्टर) तथा स्नातकोत्तर के अंतिम वर्ष (चतुर्थ सेमेस्टर) में शोध प्रतिवेदन लिखवाना प्रारंभ किया जा चुका है।

इस प्रकार वर्तमान में स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएच.डी. स्तर पर अकादमिक शोध-अध्ययन एवं अकादमिक लेखन निम्नांकित रूप से संचालित हो रहे हैं—
• सामुदायिक जुड़ाव गतिविधि रिपोर्ट (Community Engagement Report)
• प्रशिक्षुता गतिविधि रिपोर्ट (Apprenticeship/Internship Report)
• फील्ड विजिट रिपोर्ट (Field Visit Report)
• प्रोजेक्ट रिपोर्ट (Project Report)
• असाइनमेंट लेखन एवं प्रस्तुतीकरण (Assignment Writing and Presentation)
• थीसिस/डिसर्टेशन (Thesis/Dissertation)

‘शोध विज्ञान’ एक विस्तृत एवं गतिशील अध्ययन शाखा है, जिसका अध्यापन लगभग सभी विषयों में किया जाता है। एक संकाय के अंतर्गत विषयों में शोध विज्ञान में एकरूपता दिखाई देती है।

इसलिए, सामाजिक विज्ञान शोध प्रविधि इस संकाय के सभी विषयों में लगभग एक समान पाठ्यक्रम के रूप में पढ़ाई जाती है।

जैसे प्रत्येक विद्यार्थी के लिए शोध-प्रविधि को पढ़ना अनिवार्य है, प्रत्येक शोधार्थी का शोध प्रविधि का जानकार होना आवश्यक है, उसी तरह प्रत्येक शिक्षक का शोध विज्ञान में पारंगत होना आवश्यक है।

एक शोध निर्देशक से अपेक्षा होती है कि वह अपने मूल विषय का विद्वान होने के साथ-साथ शोध प्रविधि एवं तकनीक पर भी गहरी पकड़ रखता हो।

किन्तु, अधिकांश विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों में ‘शोध-प्रविधि’ अध्ययन के प्रति अरुचि देखने को मिलती है। ऐसा माना जाता है कि यह क्षेत्र एक तकनीकी और तार्किक अध्ययन क्षेत्र है, जो हर किसी के लिए आसानी से बोधगम्य नहीं होता है।

साथ ही, शोध प्रविधि पर उपलब्ध पुस्तकों के संबंध में तीन बातें सामने आती हैं—
• लेखकों के मूल विषय का प्रभाव शोध की अवधारणाओं एवं उदाहरणों में स्पष्ट दिखाई देता है।
• इस विषय पर हिंदी भाषा में, वह भी सरल एवं बोलचाल की भाषा में पुस्तकें कम उपलब्ध हैं।
• अंग्रेजी की तुलना में हिंदी में जटिलता अधिक होने के कारण समझने में कठिनाई होती है।

इन परिस्थितियों के समाधान हेतु प्रस्तुत पुस्तक ‘अकादमिक शोध’ सरल हिंदी भाषा में लिखी गई है, जिससे बोधगम्यता आसान हो सके।

पुस्तक में—
• भाषा की सरलता के साथ अकादमिक स्तर बनाए रखने का प्रयास किया गया है, जिससे यह पुस्तक स्नातक से लेकर पीएच.डी. स्तर तक के विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त हो।
• अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए प्रत्येक परिभाषा एवं महत्वपूर्ण कथनों का अंग्रेजी रूप फुटनोट में दिया गया है।
• लगभग सभी अवधारणाओं को पर्याप्त एवं उपयुक्त उदाहरणों के साथ समझाया गया है।
• जटिल प्रक्रियाओं को चित्र एवं फ्लोचार्ट के माध्यम से सरल रूप में प्रस्तुत किया गया है।
• अकादमिक शोध से संबंधित नवीनतम परिवर्तनों को ध्यान में रखा गया है।

स्नातक से पीएच.डी. तक शोध विज्ञान एक विस्तृत अध्ययन क्षेत्र है, जिसे एक ही पुस्तक में समाहित करना संभव नहीं है। इसलिए ‘अकादमिक शोध’ को तीन पुस्तकों की श्रृंखला के रूप में प्रस्तुत किया गया है—
• प्रथम पुस्तक—शोध की मूल अवधारणाएँ, प्रक्रिया एवं पद्धति को सरल भाषा में समझाती है।
• द्वितीय पुस्तक—शोध डायरी, जो शोध प्रबंधन एवं रिकॉर्ड रखने में सहायक है।
• तृतीय पुस्तक—तथ्य संकलन से लेकर प्रतिवेदन लेखन तक की प्रक्रिया को सरल बनाती है।

पुस्तक अध्ययन के संकेत—
• उदाहरणों के माध्यम से विषय चयन में सहायता दी गई है (उदाहरण अंडरलाइन में दिए गए हैं)।
• प्रक्रियाओं एवं चरणों को समझाने के लिए फ्लोचार्ट का उपयोग किया गया है।
• सैद्धांतिक विषयों का व्यावहारिक प्रस्तुतीकरण किया गया है।

पुस्तक को उत्कृष्ट बनाने का पूर्ण प्रयास किया गया है, फिर भी किसी त्रुटि या कमी के लिए लेखिका अग्रिम रूप से क्षमा प्रार्थी है। सभी विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों से अपेक्षा है कि वे आगामी संस्करण हेतु अपने सुझाव एवं फीडबैक अवश्य प्रदान करें।

About the Author

डॉ. मेधा पाण्डेय

डॉ. मेधा पाण्डेय, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन में 'लोक प्रशासन' विषय की शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। उच्च शिक्षा विभाग में 20 वर्षों के शैक्षणिक अनुभव, शोधपरक अध्ययन-अध्यापन एवं विभिन्न अकादमिक एवं प्रशासनिक दायित्वों के निर्वहन के साथ-साथ "रेकी मास्टर काउन्सलर" के रूप में भी गैर-लाभकारी सेवाएँ दे रही हैं। आध्यात्मिक अध्ययन में रुचि रखने के साथ-साथ अकादमिक विषयों पर लेखन कार्य में भी सक्रिय हैं।

लेखिका की अभी तक 1 पुस्तक, 9 शोध पत्र, 3 बुक चैप्टर, 6 सेल्फ लर्निंग मटेरियल, 2 न्यूज़ मैगज़ीन आर्टिकल तथा 5 वर्कशॉप मॉड्यूल प्रकाशित हो चुके हैं। अध्ययन-अध्यापन को समर्पित लेखिका का मुख्य उद्देश्य रहता है कि अधिकतम विद्यार्थियों को सरल तरीके से विषय समझाया जाए तथा उनमें अध्ययन के प्रति रुचि विकसित की जाए।

प्रस्तुत पुस्तक भी इसी उद्देश्य के साथ लिखी गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के पश्चात वर्ष 2021 से 'शोध प्रविधि' कोर्स (प्रश्न पत्र) स्नातक एवं स्नातकोत्तर के सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य किया गया है।

पिछले 5 वर्षों से इस कोर्स का अध्यापन करते हुए लेखिका ने अनुभव किया कि विद्यार्थियों को 'शोध प्रविधि' की भाषा और अवधारणाएँ क्लिष्ट एवं कठिन लगती हैं। यही स्थिति पीएच.डी. शोधार्थियों में भी देखी जाती है।

कई विद्यार्थियों ने लेखिका से निवेदन किया कि उनके कक्षा व्याख्यान और उनमें उपयोग किए गए चित्रों को पुस्तक रूप में प्रस्तुत किया जाए। इसी आधार पर लेखिका ने 'अकादमिक शोध' शीर्षक के अंतर्गत दो पुस्तकों का निर्माण किया है— पहला भाग (अकादमिक शोध: अवधारणाएँ, प्रक्रिया एवं प्रविधि) शोध अध्ययन के लिए विद्यार्थियों और शोधार्थियों को मानसिक रूप से तैयार करता है, जबकि दूसरा भाग (अकादमिक शोध: शोध दैनन्दिनी) शोधार्थियों के लिए 'शोध प्रबंधन' हेतु रिसर्च डायरी प्रदान करता है।

दोनों पुस्तकें न केवल विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए, बल्कि शिक्षकों के लिए भी एक उपयोगी 'मार्गदर्शिका' सिद्ध होंगी, ऐसा विश्वास है।

लेखिका के 'अभिसंचन' (Abhisinchan) नाम से YouTube चैनल, Instagram अकाउंट तथा Facebook अकाउंट पर भी व्याख्यान एवं अन्य महत्वपूर्ण शैक्षणिक जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।

About The Publisher:

AGPH Books is a Professional Self Book Publishing House based in Central India, specializing in academic, professional, fiction, and non-fiction books in both print, digital and audio formats. The publishing house produces textbooks, research and reference works, biographies, self-help titles, children’s books, literary fiction, poetry, and general interest publications. With a transparent publishing process and strong digital distribution, AGPH Books ensures global availability through Google Books, Amazon, Flipkart, and its official website store, supporting authors and institutions in reaching a wide and diverse readership.

Product Details

No. Of Pages:594
Publication Date:16/02/2026
ISBN:9789376400553

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Width: 15.24 cm
Height: 1.60 cm

About the Author

डॉ. मेघा पाण्डेय
डॉ. मेघा पाण्डेय

Dr. Megha Pandey is a respected academician, educator, and researcher with extensive experience in higher education and scholarly studies. Throughout her academic career, she has remained committed to promoting research excellence, critical thinking, and knowledge creation among students and scholars. Through अकादमिक शोध भाग 1 (Academic Research Part 1), Dr. Megha Pandey seeks to simplify the complexities of research methodology and empower learners with the knowledge and skills required for successful academic research. Her work reflects a deep commitment to educational advancement and scholarly development. Following अकादमिक शोध भाग 1 (Academic Research Part 1), Dr. Megha Pandey is preparing upcoming parts that will focus on advanced research, academic writing, publication strategies, and scholarly development. These books will help students, researchers, and educators strengthen their research skills and achieve academic success. Through these forthcoming parts, she aims to make research learning more practical, accessible, and impactful.

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अकादमिक शोध भाग 1 : अवधारणाएँ , प्रक्रिया एवं प्रविधि